गाती प्रकृति गीत नयी
लेकर हर्षोल्लास उमंग नयी
त्यौहार हमारा साल नयी
फागुन रंगीन गा रही गीत नयी
नव प्रतिपदा हर्ष नयी
त्योहार हमारा कामना मंगलमई
उठ चुकी जीवन,ऊर्जा नयी
सूर्य हुआ प्रबल तो
गाती प्रकृति गीत नयी
मधुर मुधर गूंजन संग
कलियों में राग नयी
पंखुड़ियां खिलने को बेताब
आ चुका नव वर्ष मना रहा प्रकृति,त्यौहार नयी
धरा बनी दुल्हन सब भाव नयी
किरणों संग संगम दिखा रही नदीयां
अद्भुत है पूर्ण भाव भरी
शाख शाख है बसंत बहार
कलरव सुनाती पंक्षीयां
उसकी हर राग नयी
हवाएं झुला रही डालियां
फूलों की बरसात नयी
नव वर्ष है उत्साहित
जन - जन गा रही संगीत नयी
© प्रिया प्रसाद
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