Wednesday, April 10, 2024

छाया शाह *"सख्य"*

नववर्ष 

पती पती देखो कैसी कोंपलें फुटी है,
धरती को सजाने सारी प्रकृति जुटी है।

धूले प्रेम के रंग में यह नववर्ष कहेलाता, 
चैत्री एकम निले वस्त्र पे गुलाबी बुटी है।
 
मंगलमय स्वागत हो मौसम है अलबेला,
कोयल गा रही, प्रकृति सज के लूटीं है।

हो जग का उत्थान लगे स्वर्ग समान,
हरी भरी धरती लगती स्वर्ण में घूंटी है।

सभ्यता अपनी "सख्य" देती है बधाई नववर्ष की, 
स्फटिक सी संस्कृति प्रकाश पुंज कोटी है।

छाया शाह *"सख्य"* मुंबई

प्रियंका प्रियदर्शिनी

*चैत्र नववर्ष*

नव उमंग है . नव तरंग है .
नव संदेश का नव उत्कर्ष है । 
नव चेतन है . नव स्पर्श है .
आ चुका अब नया वर्ष है।
गेहूँ की लहराती खेतों से .
इस धरा का रूप सवर्ण है।
सृष्टि के सृजन कार्य को .
करने को आतुर नव संवतसर है।
पेड़ों और पौधो पर खिल रहा .
अब नव रूप श्रृंगार है।
आम ने अपने नन्हें टिकुलों से भरा आंगन और द्वार है ।
प्रभु की अराधना माँ का अवाहन .
सूर्य उपासना से स्फूर्ति संचार है।
चैत्र मास हिन्दू नव वर्ष की
उत्पत्ति का आधार है।

प्रियंका प्रियदर्शिनी
रांची

अनिल पांचाल सेवक

*नव वर्षाभिनंदनम्*   🌈
*विक्रम संवत २०८१,*🌈
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*स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा*
*अभिनंदन नववर्ष तुम्हारा*
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*देकर नव प्रभात विश्व को*
*हरो त्रस्त जगत अंधियारा*
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*हर मन को दो तुम आशा*
*बोलें सभी प्रेम की भाषा*
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*समझें जीवन की सच्चाई*
*पाटे सब कटुता की खाई*
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*जन-जन में सद्भाव जागे*
*घर घर में फैले उजियारा*
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*मांगें प्रदाता से हम ये वर*
*प्रसन्न रहे हम जीवन भर*
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*स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा*
*अभिनंदन नववर्ष तुम्हारा*
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*अनिल पांचाल सेवक*✒️
=====उज्जैन=======👉

रंजुला चंडालिया कुमुदिनी

10/4/24
     हिन्दू नव वर्ष
          गुलाबी आभा सा आदित्य 
        हुआ ,
         दिनकर  , की उर्वशी सी 
      प्रकृति की छवि का साक्षात्कार हुआ ।
   रश्मि रथी के रथ से नव वर्ष का 
    मंगल गान हुआ ।
    श्रद्धा  इड़ा की लज्जा से कलियों का परिधान हुआ ।
   आम्र तरुओं की मंजरियों से 
      रसाल समीर का पान हुआ।
  लहलहाती फसलों व  पत्ती पत्ती
    पर सुखद तरुणायी का आगाज हुआ ।
   नवयौवना के मुस्काते अधरों पर
     खिलती कलियों का राज हुआ
    नव वर्ष का हर ओर  मंगल गान हुआ ।
  तपती धरती पर श्रम सीकर का 
   वर्षण होने पर ,
    अन्न धन धान्य समृद्ध हुआ ।
  चैत्र नवरात्र की महिमा का अवतार हुआ ,
   मां दुर्गा के नौ रूपों का 
        गुण गान हुआ।
द्वारा -- रंजुला चंडालिया कुमुदिनी महाराष्ट्र से

प्रणीता प्रभात

मंच को नमन 🙏
विषय - भारतीय नववर्ष

भारतीय नववर्ष शुभ मंगलमय हो...... 
नई पहल से शुभारंभ हो ,
कठिन जिंदगी सरल सहज हो ,
भारतीय नववर्ष शुभ मंगलमय हो..... 
अनसुलझी जो रह गई बातें ,
नववर्ष में उनका भी हल हो , 
सिन्दूरी भोर लिए आए नव वर्ष ,
सबके लिए सुनहरा पल हो ,
भारतीय नववर्ष शुभ मंगलमय हो..... 
नई सुबह की नई धूप में ,
नई आशाओं की नई किरण हो , 
भूले सारी कड़वी यादें ,
हर ओर प्रेम सौहार्द्र की जय हो, 
भारतीय नववर्ष शुभ मंगलमय हो...... 
स्नेहिल सूरज बांटे नई-नई सौगातें ,
हवाएँ भी मीठे गीत गुनगुनाते , 
चहूँ ओर खुशियों की बहार हो, 
भारत का भविष्य स्वर्णिम - सुखद हो 
भारतीय नववर्ष शुभ मंगलमय हो......, 
 
स्वरचित 
प्रणीता प्रभात
फरीदाबाद , हरियाणा

अपराजिता रंजना

शीर्षक-नव वर्ष नया हर्ष
***********
चैत्र तुम नव वर्ष लेकर नया हर्ष खुशियों के साथ 
  इस बार आना।
नया जोश नया उत्साह
सबके दिल में जगाना।
आँधी आये,तूफान आये
चाहे छाये अन्धेरा।
 प्रकाश रखे जो मन 
  के अंदर 
 वहीं सवेरा लाना।
पग- पग पर गिरना
पर तुरंत सम्भलना।
लड़खड़ाते कदमों को
खुद ही मजबूत करना।
लाख मुसीबत आ जाये
प्रेरणा खुद ही बनना।
नव वर्ष इस बार नया जोश मन में भरना।
विजेता चलते एक राह
एक राह के राही बनना।
अधूरे सपनें पूरा करना।
इरादों को फ़ौलाद बनाना।
लक्ष्य रहे मंजिल को पाना।
असंभव है,यहाँ बहुत कुछ
अपने हौसलों से संभव करना।
नया वर्ष नयी ऊर्जा देना।
जग का अन्धेरा करना दूर।
मशाल लेकर हाथों में चलना।
आसमां भी होगा तेरा
 एक दिन।
खुद पर यकीन बनाये रखना।
नव वर्ष खुशियों की वर्षा करना।
**********
स्वरचित मौलिक 
अपराजिता रंजना 
पटना (बिहार)

डॉ. लूनेश कुमार वर्मा

*नए साल का लक्ष्य* 

आया है साल नया
 तुम्हें मुबारक हो मेरे यार 
आए साल नया हर साल
लाये दामन में अपनी
 खुशियाँ समेटे हजार
बगिया यूँ ही महकती रहे
आती रहे जीवन में बहार
 समय कर रहा है पुकार 
हो जाओ होशियार 
आया है साल नया
यूँ तो आती रहेंगी बहारें 
जाती रहेंगी बहारें
आयेगा न कभी 
लौट के समय तुम्हारा
जो करना है तुम्हें ही करना है 
ठान लो आज ही
अवसर आया है बड़ा ही पावन 
मौका हाथ से निकल न जाए
सोच लो, समझ लो
हो जाओ होशियार
लक्ष्य को बाँध लो 
पकड़ लो
कमर कसकर हो जातो तैयार
अब लगाना है तुम्हें ही अपनी नैया पार।

डॉ. लूनेश कुमार वर्मा
       डॉ. लूनेश कुमार वर्मा जन्म- 17-05-1977। जन्म स्थान- घोटिया, तह.पलारी, जिला- बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़)। माँ श्रीमती रामप्यारी वर्मा, बाबूजी डॉ. टेकराम वर्मा। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में व्याख्याता के पद पर कार्यरत हैं।
आपने एम.ए. संस्कृत, बी.एड., एम.ए. हिंदी, एम. ए. भाषा विज्ञान, केंद्रीय अध्यापक पात्रता परीक्षा, एम.ए. प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व, डिप्लोमा इन इंग्लिश, एम.फिल. हिंदी, पीएच.डी. हिंदी किया है। शिक्षा क्षेत्र में आपका 19 वर्षों का शिक्षण अनुभव है।
आपका शोध विषय "समकालीन कहानी लेखन के संदर्भ में उदय प्रकाश की कहानियों का साहित्यिक अनुशीलन" है। आपने उदय प्रकाश की प्रसिद्ध कहानी 'मोहनदास' का संस्कृत अनुवाद 'मोहनदास:' (2022) और 'तिरिछ' कहानी का संस्कृत अनुवाद 'तिरछ:' (2023) किया है। हिंदी कविता संग्रह ‘जीवन एक नदिया है’ (2023), हिंदी हाइकु संग्रह ‘खिलता पुष्प’(2023), गीना काव्य मंजूषा साझा संग्रह (2023), गीना लघुकथा साझा संग्रह (2023) आपकी कृतियाँ हैं।
आपने राष्ट्रीय और अंताराष्ट्रीय अनेक कार्यशालाओं, सेमिनार-वेबीनार में भाग लिया है। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में संस्कृत-हिंदी-छत्तीसगढ़ी आधारित 55 से अधिक शोध परक लेख-आलेख प्रकाशित हुए हैं।
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर, राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद छत्तीसगढ़ शंकर नगर रायपुर, शासकीय शिक्षा महाविद्यालय रायपुर, डाइट रायपुर, संस्कृत विद्यामंडलम् छत्तीसगढ़, संस्कृत भारती इत्यादि संस्थानों में विविध अकादमिक गतिविधियों में आपकी सक्रिय सहभागिता रहती है।

डॉ. लूनेश कुमार वर्मा (व्याख्याता)
मोबाइल नंबर- 8109249517
म.नं. 3349(रामालय) वार्ड- 61
काजल किराना के पास
शुक्ल वंशम के पीछे, 
रावतपुरा कालोनी फेस-01
मठपुरैना. पोस्ट- सुंदर नगर 
तह+जिला- रायपुर (छत्तीसगढ़)
पिन 492001 
ई मेल- luneshverma@gmail.com

छाया शाह *"सख्य"*

नववर्ष  पती पती देखो कैसी कोंपलें फुटी है, धरती को सजाने सारी प्रकृति जुटी है। धूले प्रेम के रंग में यह नववर्ष कहेलाता,  चैत्री एकम निले वस्...