शीर्षक-नव वर्ष नया हर्ष
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चैत्र तुम नव वर्ष लेकर नया हर्ष खुशियों के साथ
इस बार आना।
नया जोश नया उत्साह
सबके दिल में जगाना।
आँधी आये,तूफान आये
चाहे छाये अन्धेरा।
प्रकाश रखे जो मन
के अंदर
वहीं सवेरा लाना।
पग- पग पर गिरना
पर तुरंत सम्भलना।
लड़खड़ाते कदमों को
खुद ही मजबूत करना।
लाख मुसीबत आ जाये
प्रेरणा खुद ही बनना।
नव वर्ष इस बार नया जोश मन में भरना।
विजेता चलते एक राह
एक राह के राही बनना।
अधूरे सपनें पूरा करना।
इरादों को फ़ौलाद बनाना।
लक्ष्य रहे मंजिल को पाना।
असंभव है,यहाँ बहुत कुछ
अपने हौसलों से संभव करना।
नया वर्ष नयी ऊर्जा देना।
जग का अन्धेरा करना दूर।
मशाल लेकर हाथों में चलना।
आसमां भी होगा तेरा
एक दिन।
खुद पर यकीन बनाये रखना।
नव वर्ष खुशियों की वर्षा करना।
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स्वरचित मौलिक
अपराजिता रंजना
पटना (बिहार)
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