10/4/24
हिन्दू नव वर्ष
गुलाबी आभा सा आदित्य
हुआ ,
दिनकर , की उर्वशी सी
प्रकृति की छवि का साक्षात्कार हुआ ।
रश्मि रथी के रथ से नव वर्ष का
मंगल गान हुआ ।
श्रद्धा इड़ा की लज्जा से कलियों का परिधान हुआ ।
आम्र तरुओं की मंजरियों से
रसाल समीर का पान हुआ।
लहलहाती फसलों व पत्ती पत्ती
पर सुखद तरुणायी का आगाज हुआ ।
नवयौवना के मुस्काते अधरों पर
खिलती कलियों का राज हुआ
नव वर्ष का हर ओर मंगल गान हुआ ।
तपती धरती पर श्रम सीकर का
वर्षण होने पर ,
अन्न धन धान्य समृद्ध हुआ ।
चैत्र नवरात्र की महिमा का अवतार हुआ ,
मां दुर्गा के नौ रूपों का
गुण गान हुआ।
द्वारा -- रंजुला चंडालिया कुमुदिनी महाराष्ट्र से
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