*चैत्र नववर्ष*
नव उमंग है . नव तरंग है .
नव संदेश का नव उत्कर्ष है ।
नव चेतन है . नव स्पर्श है .
आ चुका अब नया वर्ष है।
गेहूँ की लहराती खेतों से .
इस धरा का रूप सवर्ण है।
सृष्टि के सृजन कार्य को .
करने को आतुर नव संवतसर है।
पेड़ों और पौधो पर खिल रहा .
अब नव रूप श्रृंगार है।
आम ने अपने नन्हें टिकुलों से भरा आंगन और द्वार है ।
प्रभु की अराधना माँ का अवाहन .
सूर्य उपासना से स्फूर्ति संचार है।
चैत्र मास हिन्दू नव वर्ष की
उत्पत्ति का आधार है।
प्रियंका प्रियदर्शिनी
रांची
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