Wednesday, April 10, 2024

प्रियंका प्रियदर्शिनी

*चैत्र नववर्ष*

नव उमंग है . नव तरंग है .
नव संदेश का नव उत्कर्ष है । 
नव चेतन है . नव स्पर्श है .
आ चुका अब नया वर्ष है।
गेहूँ की लहराती खेतों से .
इस धरा का रूप सवर्ण है।
सृष्टि के सृजन कार्य को .
करने को आतुर नव संवतसर है।
पेड़ों और पौधो पर खिल रहा .
अब नव रूप श्रृंगार है।
आम ने अपने नन्हें टिकुलों से भरा आंगन और द्वार है ।
प्रभु की अराधना माँ का अवाहन .
सूर्य उपासना से स्फूर्ति संचार है।
चैत्र मास हिन्दू नव वर्ष की
उत्पत्ति का आधार है।

प्रियंका प्रियदर्शिनी
रांची

No comments:

Post a Comment

छाया शाह *"सख्य"*

नववर्ष  पती पती देखो कैसी कोंपलें फुटी है, धरती को सजाने सारी प्रकृति जुटी है। धूले प्रेम के रंग में यह नववर्ष कहेलाता,  चैत्री एकम निले वस्...