शीर्षक - नव वर्ष का सूरज
नए वर्ष का सूरज उगने वाला है
लाल-केसरिया लालिमा में रंगा है,
धीरे-धीरे आसमान में चढ़ रहा है
स्वर्णिम आभा को फैलाने वाला!
प्रभात के नव किरण को देखने
उत्सुक मनवाले उधर देख रहे हैं,
आशा - दीप जला हाथ जोड़कर
मंदस्मित मंत्रोच्चारण कर रहे हैं।
कौन है वह सूरज से आगे बढकर
कौन है उस नभ से भी कहीं ऊपर,
प्रकृति की ऊर्जा-स्रोत साधने वाला
मानव का दीपक बन जलने वाला!
बिना विराम नित्य वह चलने वाला
आशा-आकांक्षाओं से परे रहनेवाला,
सभी को सदैव संदेश यह देने वाला
कर्म से बढ़कर न कोई भाग्यविधाता!
आओ, नव वर्ष में भी करें यह प्रण
नहीं छोड़कर भागेंगे कभी यह रण,
नित्यकर्म के दीप से करेंगे आरती
आशीष देती रहेंगी हमें मांँ भारती।
कविता - ©®डॉ. सुषमा तिवारी
नोएडा, गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश
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