विषय: नया साल
७ अप्रैल २०२४
स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा,
आओ, नव ज्ञान के लिए,
महान जागृति के इस युग में,
सकारात्मकता से दिव्य ज्योति जलाने के लिए।
स्वागत! नये युग का नया साल,
थके हुए का उत्थान करो संभव ,
मानवता के एक नए संगठन के लिए,
प्रेरक गीत तुम गाओ कुछ भी ना लगे असंभव ।
स्वागत है नूतन वर्ष इस देश की क्रांति के लिए,
सदियों से उपनिवेशवाद ने पीसा है,
मेहनतकश किसान के केवल मृत विचार ही बचे हैं,
श्रमिकों को नया जीवन देना अब संवैधानिक है ।
स्वागत है नव वर्षा तुम्हारा,
पकती रोटी के मिट्टी के चूल्हे की खुशबू यही कहे,
कि भूखा ना सोये कोई माँ के आँचल में,
धरा ये हमारी यही दबी छिपी अभिलाषा चाहे।
स्वलिखित सर्वाधिकार सुरक्षित
-डॉ माया एस एच
पुणे
(महाराष्ट्र)
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