Sunday, April 7, 2024

विरेन्द्र जैन

राष्ट्र कवि दिनकर सम्मान हेतु रचना 

शीर्षक : नव वर्ष
दिनांक : ०७/०४/२०२४

नव वर्ष के नव पटल पर खुशियों के नव गीत सजाएँ,
नयी धरा पर सपनों के कुछ नए नवेले बीज बिछाएं !!
 
नव दिवस की उर्जाओं संग न केवल नए लक्ष्य बनायें,
पुराने प्रणों में जान फूंककर नयी खुशबुओं से महकाएं !!

निराश ना हों उदास ना हों पुनरावलोकन का कदम उठाएं,
चूक गए जिन भी लक्ष्यों से, नव आत्म विश्वास से पुन: जुट जाएं!!
 
किंतु पहुंच से दूर क्षितिज सा अस्तित्व विहीन ना लक्ष्य बनाएं,
पांव धरातल पर रखे रहें औ फ़लक छू लेने का ख़्वाब सजाएं !!

आभासी दुनिया से निकल अब परिजन मित्रों के समीप आएं,
रिश्ते जो पीछे छूट गए कहीं, उनमें प्रेम की नव ऊष्म बहाएं !

नकारात्मकता के गहन अंधेरे जब जब मानस पटल पर छाएं,
श्रद्धा से होकर समर्पित सकारात्मकता के दीप जलाएं !

विगत काल में अधूरी रह गईं जो पूरी करें मन की अभिलाषाएं,
बीत रहा अनमोल यह जीवन हर पल इक उत्सव मनाएं!!

ईश्वर से है यही कामना सुख शांति समृद्धि बरसायें,
दें इतनी शक्ति जग में सबको दुखों पर सारे विजय पायें !!

विरेन्द्र जैन नागपुर
स्वरचित एवम् मौलिक

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