Tuesday, April 9, 2024

श्रीमती नीना श्रीवास्तव

हिंदू नववर्ष मंगलमय हो

    चैत्र शुक्ल की प्रतिप्रदा को हम नव वर्ष मानते है
गुड़ी पड़वा चैत्र नवरात्रि को नया वर्ष  हम कहते हैं

  टेसू महुआ फूले चारो और 
है प्रकृति का शोर 
नव वर्ष मनाने  देवी देवता आए 
धरा पर नाचे दादुर मोर

नव पल्लव कोपल कालिया 
प्रफुल्लित  फूले  पराग 
कुहू कुहू कोयलिया बोले
 गए नित नए मधुर राग 

ढोल नगाड़े दुंदुभी और बजे घुघरू की मधुर आवाज 
नो रूपो में माता आई  हिन्दू 
नव वर्ष मानते आज

नव दुर्गा मां घोड़े पर सवार होकर
दिव्य धारा पे अवतरित हो गई 
नव वर्ष के स्वागत करने को 
परियां लताओं सी बन  लिपट गई
 

बशुंधरा महकी फूले आम के बोर
तितली भंवरा  नाचे घूमे चारो ओर
लगे गूंजने मां के मंदिर चारो ओर नव वर्ष मनाए खुश  होकर  

नवयोवन करके  श्रंगार 
ऐसे नाचे धारा में आज 
सुंदर  धवल चांदनी जैसे
छिटक रही  ठंडी चले बयार
नव वर्ष का स्वागत करने 
जैसे आई  अपशारा आज 


कवि दिनकर है बड़े महान 
कविता  लिखकर देते ज्ञान
नही मानते पाश्चात्य। नववर्ष
करते है नही  स्वीकार  
चैत्र शुक्ल की प्रतिप्रदा को 
हम नव वर्ष मानते है 
हम नव वर्ष मानते है 



स्वरचित कविता 
  श्रीमती नीना श्रीवास्तव 
जबलपुर  मध्य प्रदेश। 
८ / ४ / २००२४

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