हिंदू नववर्ष मंगलमय हो
चैत्र शुक्ल की प्रतिप्रदा को हम नव वर्ष मानते है
गुड़ी पड़वा चैत्र नवरात्रि को नया वर्ष हम कहते हैं
टेसू महुआ फूले चारो और
है प्रकृति का शोर
नव वर्ष मनाने देवी देवता आए
धरा पर नाचे दादुर मोर
नव पल्लव कोपल कालिया
प्रफुल्लित फूले पराग
कुहू कुहू कोयलिया बोले
गए नित नए मधुर राग
ढोल नगाड़े दुंदुभी और बजे घुघरू की मधुर आवाज
नो रूपो में माता आई हिन्दू
नव वर्ष मानते आज
नव दुर्गा मां घोड़े पर सवार होकर
दिव्य धारा पे अवतरित हो गई
नव वर्ष के स्वागत करने को
परियां लताओं सी बन लिपट गई
बशुंधरा महकी फूले आम के बोर
तितली भंवरा नाचे घूमे चारो ओर
लगे गूंजने मां के मंदिर चारो ओर नव वर्ष मनाए खुश होकर
नवयोवन करके श्रंगार
ऐसे नाचे धारा में आज
सुंदर धवल चांदनी जैसे
छिटक रही ठंडी चले बयार
नव वर्ष का स्वागत करने
जैसे आई अपशारा आज
कवि दिनकर है बड़े महान
कविता लिखकर देते ज्ञान
नही मानते पाश्चात्य। नववर्ष
करते है नही स्वीकार
चैत्र शुक्ल की प्रतिप्रदा को
हम नव वर्ष मानते है
हम नव वर्ष मानते है
स्वरचित कविता
श्रीमती नीना श्रीवास्तव
जबलपुर मध्य प्रदेश।
८ / ४ / २००२४
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