*चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भारतीय हिंदी नववर्ष*
भारत धरा बसंती बयार युक्त होकर,
पूरा देश एक सूत्र है इस रोज़।
अवनि और अंबर हर्षित होकर,
बह रही बयार सुगंधित इस रोज।
दशों दिशाएं पुलकित हैं,
भारत भूमि के गीत गा रहीं इस रोज।
देख छटा इस पुण्य धरा की ,
प्रकृति श्रंगारित कर रही है देश इस रोज़।
जय जवान, जय किसान का नारा
समृद्ध कर रहा भारत को इस रोज।
उत्तर-दक्षिण,पूरब-पश्चिम एकता के सूत्र में
बांध रहा नव वर्ष इस रोज।
उत्साह, उमंग से तरंग उठाता,
कर्त्तव्य बोध जगाता ये नव वर्ष इस रोज।
पुण्य धरा प्रत्येक घर में,
धन-धान्य की खुशहाली लाती इस रोज।
भारत भूमि सतरंगी होकर,
परिधान पहन हर्षाती इस रोज।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा नव वर्ष,
बयार हो जाती सुगंधित इस रोज।
बसंत बहार फागुनी रंग पाकर
अवनिअंबर मुस्काता इस रोज़।
स्वरचित कृति: शरीफ़ खान,
रावतभाटा, कोटा, राजस्थान।
*हिंदू नव वर्ष विक्रम संवत उत्सव पर*
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत
नूतन वर्ष से हर्षित हो सबका जीवन, आशा की नवीन किरणें, खिले मन,
नवीन सपनो से भर दे जीवन।
रंगीन उत्सव , मिठास भरा
प्रेम और खुशियों से घिरा तन मन।
सभी मनाएं खुशियों का जहां,
साथ चलें हर व्यावसायी और किसान।
नवीन उमंग, नया संघर्ष,
नव संवत्सर के हर लम्हा में आशियान।
जीवन को सजीव, सपनों को साकार,
कर दे संकल्प नूतन ।
नव वर्ष की आए सौगात ,
खुशियों का रंग, नव संभावनाओं का संगम।
प्रेम, शांति, आनंद की बौछार से
हर दिन नव रंग, नव उमंग।
नव वर्ष की सुगंधित लहरें,
ताजगी भरे मन से प्रफुल्लित हो अंतर्मन।
स्व रचित कृति द्वारा:
शरीफ़ खान
रावतभाटा कोटा राजस्थान।।
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