Tuesday, April 9, 2024

शालिनी श्रीवास्तव ‘सनशाइन’

*हिन्दू नववर्ष*

बसंत बीता, फागुन बीता,
चैत्र  की नवरात्र है आई।
हिन्दू विक्रम संवत्सर की,
हार्दिक- हार्दिक बधाई। 
          घर-घर  तोरण द्वार सजाओ, 
          सब मिलकर मंगल धुन गाओ।
          मां अम्बे का आराधन  कर,
          सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि पाओ।
नव दुर्गा का करके वंदन,
नूतन वर्ष  का अभिनंदन,
मना रही यह सारी सृष्टि
राम जन्म का सुंदर उत्सव। 
          कुंदन सी धरती दमक रही,
          गेंहू की बालियां लहक रही।
         अमिया सेआम की डाल लदी,
          कोयल बगिया में कुहुक  रही।

महुआ से उपवन महक रहा
पपीहे नें शोर मचाया है,
मौसम की इस अंगड़ाई से
तन मन में आलस आया है।
          किन्तु न तुम आलस्य करो
          उठ जाओ मनुज तुम कर्म करो,
          ब्रम्हा ने सृष्टि की रचना की  
          तुम भी जीवन को सुफल करो।

स्वरचित अप्रकाशित 
शालिनी श्रीवास्तव *सनशाइन*
गोरखपुर  उत्तर प्रदेश।

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