Thursday, April 4, 2024

अन्जू परिहार

*नया दिन है नया सवेरा*
नया दिन है नया सवेरा
अंखियों से उड़ गया अंधेरा
मुबारक हो नया साल दोबारा..।

ब्रम्हा जी ने रची सृष्टि की रचना
तभी कहलाया हिन्दू नववर्ष अपना
लेके आया अनेक त्यौहारों का खजाना..।

चारों तरफ फैला खुशियों का उजाला
गुडीपडवा लेकर नया साल था आने वाला
मन मैरा हो गया बडा़ ही मतवाला..।

पहला चैत्र माह का महिना आया
अपने साथ रंगों की है सौगात लाया
द्वार पर मैने रंगोली को है सजाया..।

मैरा मन हर्षोल्लास से भर आया
सतरंगी मिठाइयों से है थाल सजाया
मेहमानों को खूब खिलाया पिलाया..।

स्कूलों के नये सत्र की हो गयी तैयारी
लहलहाई फसलें कट गयी सारी की सारी
सब घरों मे आ गयी है खुशियों की बारी..।

बसंत ऋतु का हुआ है आगमन
लिये माँ दुर्गा स्वरूपो की साधना
नये साल से मन हो गया अतिपावन..।

आशाओ की नई किरण के साथ
जिंदगी में लाये खुशियों की सौगात
क्योंकि हो गयी है नये साल की शुरुआत..।

- अन्जू परिहार
 शाहजहांनाबाद, भोपाल, मध्यप्रदेश।

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