नववर्ष की महिमा
चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को ,कहते गुडी पाडवा, युगादि, संवत्सरारंभ।
कहते हैं इसे वर्ष प्रतिपदा,बसंत ऋतु प्रारंभ दिन, विक्रम संवत् वर्षारंभ।
इस दिन को नववर्ष मनाने के हैं, नैसर्गिक, एतिहासिक ,आध्यात्मिक कारण।
इसी दिन राम जी का हुआ था राज्याभिषेक,
किए थे प्रभु राज मुकुट धारण।
इसी दिन अयोध्या में श्री राम जी के, विजयोत्सव का आनंद था लहराया।
अयोध्या में घर-घर के द्वार-द्वार पर, धर्म-ध्वज गया था लोगों द्वारा फहराया।
प्रतीक स्वरूप इसी के, धर्म- ध्वज इस दिन आज भी फहराया जाता है।
गुडी का अर्थ होता है विजय पताका, महाराष्ट्र में गुडी पाडवा कहलाता है।
कहते हैं चारों युगों में सतयुग का,आरंभ भी इसी तिथि को हुआ था।
श्री कृष्ण की विभूति स्वरूप बसंत ,धरा को इसी तिथि को छुआ था ।
वृक्षों पर नये-नये कोंपलों का ,हो जाता है इसी दिन से शुरू आना।
कोयलें भी कुहु-कुहू कर सुनाने लगती हैं, मधुर तान से फिर गाना।
उल्लास, उमंग, खुशी और चारों तरफ पुष्पों की फैल जाती है सुगंधि।
भौंरों का गुंजार, मंद गति से पवन बह कर,जैसे करें बसंत संग संधि।
मान्यता इसके पीछे है कहा जाता, विद्वानों के द्वारा है एक यह भी।
किये थे इसी दिन से शुरू, ब्रह्माण्ड का निर्माण सृष्टि कर्ता ब्रह्मा जी।
सृष्टि कर्ता ब्रह्मा जी के द्वारा, निर्मित होने के कारण यह ब्रह्माण्ड।
कहते हैं इस ब्रह्माण्ड को ब्रह्माण्ड, नाम पड़ा ब्रह्माण्ड का ब्रह्माण्ड।
कहते हैं सृष्टि की रचना भी इसी दिन से, सृष्टि कर्ता ब्रह्मा किए थे शुरू।
ब्रह्मा जी सृष्टक, विष्णु जी पालक, शिव जी संहारक इस सृष्टि के गुरु।
इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने, शंका पर विजय प्राप्त कर लिया।
चिरस्थाई बनाने उस विजय को, फिर विक्रम संवत प्रारंभ कर दिया ।
शालिवाहन राजा ने भी इसी दिन, अपने शत्रु पर विजय पाई थी।
और फिर इसी दिन से, शालिवाहन पंचांग शुरू कर के चलाई थी ।
इसी तिथि को प्रभु श्री राम जी, बालि का वध कर राज्य सुग्रीव को दिए।
इसी तिथि को युधिष्ठिर जी का भी, राजतिलक हैं करूणा सिंधु ने किए।
इस दिन प्रातः नित्यकर्म कर, तेल का उबटन लगाकर स्नान करते हैं।
नवीन वस्त्र धारण कर सब , अपने मन को आनंद,उल्लास से भरते हैं।
घर को ध्वज, पताका, बंदनवार आदि, शुभ सामाग्रियों से सजाया जाता है।
प्रेम पूर्वक मिलकर सबसे नूतन वर्ष का, बधावा बजाया जाता है।
प्रथम पूजनीय गणेश जी की पूजा, करते हैं इस दिन व्यापारी गण।
पुरानी बहीखाता बदल कर अपनी ,बनाते हैं बहीखाता पुनः नूतन ।
इस दिन नवरात्रि की भी होती है, भक्तों द्वारा कलश की स्थापना।
नौ दिनों तक चलती है फिर ,भक्ति- भाव से माता रानी की साधना।
नवमी तिथि को किया जाता है, नौ कन्या पूजन कर व्रत का पारायण।
मां से मांगूं नित मैं तो अपना अराध्य, अखिल ब्रह्माण्ड नायक नारायण।
रचयिता -श्रीमती सुमा मण्डल
वार्ड क्रमांक 14 पी व्ही 116
नगर पंचायत पखांजूर
जिला कांकेर छत्तीसगढ़
पिन कोड 494776
मोबाइल नंबर 6266961542
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