Sunday, April 7, 2024

राजन कार्तिकाय

राष्ट्रकवि दिनकर सम्मान 2024 के लिए प्रेषित रचना।
 
!!विक्रम संवत्(2081)प्रकाश!!

नवल वर्ष है, नवल हर्ष है,
होगा अब उत्कर्ष नवल।
छोड़ जीर्णता को चमकेगा, 
अपना भारत वर्ष नवल।।

सम्राट विक्रमादित्य ने ही, 
संवत्सर नया बनाया था। 
जब आक्रमक दुष्ट भयंकर, 
शत्रु शकों को हराया था।।

चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा से, 
नव संवत्सर हुआ सबल। 
नवल वर्ष है, नवल हर्ष है,
होगा अब उत्कर्ष नवल।।

राष्ट्रकवि दिनकर जी ने भी,
ईसवी सन ठुकराया है।
विक्रम संवत को ही अपना,
संवत्सर बतलाया है।।

विक्रम संवत चैत्र चंद्रमा,
चांदनी-सम सिद्ध धवल।
नवल वर्ष है, नवल हर्ष है,
होगा अब उत्कर्ष नवल।।

चैत माह में ही सृष्टि का,
ब्रह्मा ने निर्माण किया।
चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से,
शुरू सृष्टि का गान किया।।

हिंदुओं का विक्रम संवत,
निज नव वर्ष कहलाता है।
जो वसंत के साए में ही,
उर-उत्कर्ष बढ़ता है ।।

प्रथम माह यह चैत्र मानव,
उर में भरता प्रेम- प्रबल ।
नवल वर्ष है, नवल हर्ष है,
होगा अब उत्कर्ष नवल।।

----स्वरचित एवं मौलिक----

राजन कार्तिकाय 
हिन्दी-शोधार्थी 
पाटलिपुत्र विश्व विद्यालय पटना,बिहार 
Rajankan220387@gmail.com

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