((नूतन वर्ष))
हर वर्ष की तरह,
ऐ वर्ष भी आ गया,
नई उम्मीद नई उमंग,
नया उत्साह भर गया।
गुड़ी पड़वा का स्वागत,
बड़ी धूमधाम से किया,
सुबह से घर सफाई,
आंगन चौक पुराईं,
सभी को नीम गुड़,
का प्रसाद दिया।।
नीलकंठ के दर्शन,
विक्रम संवत नव वर्ष,
की शुरुआत।
बही-खाता नये साल का ,
स्वरूप बदलों चलन,
अपने अंग्रेजी ख्याल का।।
सनातन को पहचानों,
प्रकृति प्रदत्त है ऐ वर्ष,
मूल से जुडो और,
करों हर्ष।।
सूबेदार रामस्वरूप कुशवाह बैंगलौर कर्नाटक
०४/०४/२०२४
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