Wednesday, April 10, 2024

वर्षा शिवांशिका

चैत्र  नवरात्रि :२०८१
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दिन आज का सृष्टि की रचना,  
आज ही दिन सूर्य का उदय होना I 

चैत्र नए वर्ष के रूप उल्लास आया, 
कहीं गुडीपड़वा व् उगादी कहलाया I

घर अंगना सजा आज मनोहारी गुडी, 
आज फिर लौट आई नई उगादी I 

चौकट आम के पत्तों की बंदनवार, 
इन्द्रधनुषी रंगोली बनी सत्कारI   

नव दुर्गे का सुन्दर स्वरुप निराला, 
त्रिनेत्री, श्रृंगार में पहने पुष्पित माला I

भजते गाते ख़ुशी मिले सागर से, 
माता का आव्हान करे उर से I

आदि ,अनादी, अनंता तू ही कल्याणी ,
मेरे घर आंगन पधारो माता भवानी I

नव वर्ष मंगलमय करे सकल कार्य 
नवल प्रगती का पथ बने सरल सोंदर्य I

माता का आशीष अपार,प्रेम बरसो  अखंड  
सुख, समृद्धि व् विजय का हो भूखंड I

 वर्षा  शिवांशिका

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