चैत्र नवरात्रि :२०८१
🌷☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️🌷
दिन आज का सृष्टि की रचना,
आज ही दिन सूर्य का उदय होना I
चैत्र नए वर्ष के रूप उल्लास आया,
कहीं गुडीपड़वा व् उगादी कहलाया I
घर अंगना सजा आज मनोहारी गुडी,
आज फिर लौट आई नई उगादी I
चौकट आम के पत्तों की बंदनवार,
इन्द्रधनुषी रंगोली बनी सत्कारI
नव दुर्गे का सुन्दर स्वरुप निराला,
त्रिनेत्री, श्रृंगार में पहने पुष्पित माला I
भजते गाते ख़ुशी मिले सागर से,
माता का आव्हान करे उर से I
आदि ,अनादी, अनंता तू ही कल्याणी ,
मेरे घर आंगन पधारो माता भवानी I
नव वर्ष मंगलमय करे सकल कार्य
नवल प्रगती का पथ बने सरल सोंदर्य I
माता का आशीष अपार,प्रेम बरसो अखंड
सुख, समृद्धि व् विजय का हो भूखंड I
वर्षा शिवांशिका
No comments:
Post a Comment