Wednesday, April 10, 2024

रूपेश कुमार

नया साल नया दौर
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जीवन के हर रंग मे खुशियो के संग में ,
सुबह की लाली घटा शाम की तन्हाई में ,

हरे भरे पेड़ों पर चिड़िया चहकती रहे ,
खेत खलिहानों मे फसल लहलहाती रहे ,

नई रोशनी मे नये जीवन की शुरुआत हो ,
सबको जीने की नई दिशा नया राह मिले ,

ऐसा नया हो नये साल की शुरुआत हो ,
नये साल मे नये दौर की हमेशा  जज्बात हो ,

दुनिया मे आपस मे भाईचारे का संबंध हो ,
ना झगड़ा ना झंझठ और ना लड़ाई का वास हो ,

गाँव मे खुशियों की हमेशा नई - नई सौगात हो ,
सबको अपनी अभिव्यक्तियों का नया संसार मिले ,

प्रेम की ज्योति जले खुश्बुओं की हमेशा महक उठे ,
विज्ञान , तकनीकी , साहित्य की ज्वाला और जले ,

पग -पग में दिल और प्यार का हमेशा मिलन हो ,
जाति धर्म को मिटाकर सबकी धड़कनो का मिलन हो,

दुनिया मे लोक कलाओं का चहुंदिश विकास हो ,
सभ्यता और संस्कृति का नया आयाम नयी गति मिले ,

मन मस्तिष्क मे नये दुनिया की स्वागत की आशाएं हो ,
जीवन मे नये उद्देश्यों का नया अध्याय की शुरुआत हो ।

रूपेश कुमार 
चैनपुर, सीवान, बिहार

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