Wednesday, April 10, 2024

डॉ० विमलेश अवस्थी

🌻 नव वर्ष🌻
बधाई नव वर्ष की l
महकें जीवन उपवन का कुंज - कुंज I
प्रस्फुटित हो प्रबल प्रताप का प्रकाश पुंज ।
दिशि दिशि धवलिमा फैले नवल उत्कर्ष की I बधाई नव वर्ष की l
सफलता सहचरी
संचरण करती रहे ।
विजय वैजयन्ती सदा, वरण करती रहे ' ।
झर झर झरती रहे, मन्दाकिनी सुखद हर्ष की ।
बधाई नव वर्ष की ।
सत्यमेव जयते का मंत्र घहराता रहे ।
युगों तक व्योम में,
तिरंगा लहराता रहे ।
भीति ढह जाये, दुख
दैन्य संघर्ष की l
बधाई नव वर्ष की ।
2️⃣
वैदेशियत ने कुछ बनाया, इस तरह से दास अपना l
भूलते हम जा रहे है
स्वर्णमय इतिहास अपना ।
लोक जीवन सभ्यता,
संस्कृति हम भूल बैठे
विश्वव्यापी चेतना, हुंकृति हम भूल बैठे ।
भूल बैठे आश्विन, फाल्गुन, मधुमास अपना ।
भूलते हम जा रहे है स्वर्ण मय इतिहास अपना ।
हिन्द में ही हिन्द वासी, बन रहे हैं अल्पसंख्यक ।
और बढ़ते जा रहे,
मक्का मदीने के प्रशंसक ।
भारती करवा रहे है विश्व में उपहास अपना ।
भूलते हम जा रहे हैं, स्वर्ण मय इतिहास अपना ।
लो शपथ अब हम जियेंगे, सिर्फ हिन्दू के लिए ।
शम्भु बनकर विष पियेंगे, सिर्फ हिन्दू के लिए,
अन्यथा विमलेश समझो निकट सर्व विनाश अपना ।
भूलते हम जा रहे है, स्वर्ण मय इतिहास अपना I
रचना मौलिक व अप्रकाशित
डॉ० विमलेश अवस्थी
कासगंज ( उ० प्र० )

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