Wednesday, April 3, 2024

अलका बालियान

नवोत्कर्ष  

दिनकर ने ली अंगड़ाई,
नववर्ष की किरणें उत्साही,
कोयल ने कूक सुनाई,
आमों पर बौर लगे हैं भाई,
खेतों में सरसों लहराई,
किसलयों की बहार आई,
बसंतोत्सव के इस उत्सव में,
जीवों ने आवाज लगाई,
चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा में 
नवसंत्सर की बेला है आई,
प्रकृति के नव सृजन ने,
हरितिमा की हुंकार लगाई | 
नवऊर्जा, नवउल्लास, नवोत्कर्ष है भाई,
घर-द्वारों पर रंगोली सजाई,
बंदनवारों संग ध्वज पताका लहराई,
हिन्दू संस्कृति गौरान्वित हो आई........
दिनकर जी की जागृति का जश्न है माई .......
विश्व गुरु बनकर अपनी सभ्यता संजोई,
मंगल नववर्ष मनाने की घड़ी है आई |
मंगल नववर्ष मनाने की घड़ी है आई |
-अलका बालियान (आणंद) गुजरात 
-लेखिका (शिक्षिका)

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